ईमानदारी से उबाऊ सिक्का
हर उछाल अपने आप में एक अलग निकासी है, इसलिए सिक्के की कोई याददाश्त नहीं होती: लगातार पाँच हेड के बाद भी अगली उछाल आधी-आधी ही रहती है, चाहे लगे कुछ भी।
एक बार में सौ उछालिए और गिनती आधे के आसपास आकर बैठेगी — पर ठीक आधे पर शायद ही कभी, और लोगों को यही बात हैरान करती है।